श्री जानकी जयन्ती-श्री मनोज घिल्ड़ियाल
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्री जानकी जयन्ती पावन पर्व पर प्रस्तुत है जनपद पौड़ी से शिक्षक साथी श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी की कविता:
श्री जानकी जयन्ती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ! 💐💐💐💐💐
🙏श्री जानकी जयन्ती
नाम था राजा जनक, मिथिलावासी,
धर्म-कर्मरत, प्रजाहित अभिलाषी।
एक बार राज्य में जब सूखा था पड़ा,
जनहित में उन्हें हल चलाना पड़ा।।
हल चलाते-चलाते जहाँ टकराया,
खोदा वहाँ तो कलश निकल आया।
जिसमें एक सुन्दर कन्या को पाया,
राजा ने जिसे पुत्री रूप में अपनाया।।
क्योंकि हल की नोक को कहते हैैं सीता,
इसलिए हल से टकरा कहाई वो सीता।
उपजी थी भूमि से तो भूमिजा कहाई,
जनकसुता बनी तो जानकी कहाई।।
वैशाख शुक्ल नवमी पुष्य नक्षत्र था,
जब जानकी का प्राकट्य हुआ था।
आज हम सब उनकी जयन्ती मनाते हैं,
मनोकामना पूर्ण पूजा व्रत करते कराते हैं।।
🙏रचना:-
मनोज घिल्डियाल (स० अ०)
रा० प्रा० वि० कलीगाड़
प्रखण्ड - रिखणीखाल
जनपद- पौड़ी गढ़वाल
🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

सुन्दर कविता सर
जवाब देंहटाएंBahut sunder rachna
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर अभिव्यक्ति
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