सड़क-श्रीमती लता आर्य
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में वैश्विक सड़क सुरक्षा सप्ताह के अन्तर्गत प्रस्तुत है जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती लता आर्य की कविता:
सड़क
रास्तों ने हमको राह दिखाई है,
जब-जब पड़ी इन पर अपनी परछाई है।
कई अपनों को ये मिलाते हैं।
कितनी कठिन दूरी हो मंजिल तक पहुँचाते हैं।।
आँखों ने जब देखी इनकी दूरी,
पँख लगाये उड़ कर दूर की हर मजबूरी।
समय के हाथ पैर बन जाते हैं,
सड़कों पर जब हरे वृक्ष लहरातें हैं।।
ये सड़क दूरियाँ नहीं अपनों की राह बताते हैं,
मार्ग कठिन हो तब भी हम मिल ही जाते हैं।
जब ये वृक्ष मिट्टी से दूर हो जाते हैं,
तब ही ये अपना रौद्र रूप दिखाते हैं।।
कठिन होता है उस राह से गुजरना,
जब इनकी जड़ें हिल जाती हैं।
"सड़क" उस आशा को जगाती हैं,
जो बीते बचपन का सपना याद दिलाती हैं।।
लता आर्या (प्र०अ०)
रा० प्रा० वि० मनोरा
ब्लाक-भीमताल, जिला-नैनीताल
उत्तराखण्ड
🙏संकलन :टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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