राष्ट्र के आधार हैं बच्चे-श्रीमती दुर्गा भट्ट

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद रुद्रप्रयाग से  शिक्षिका बहिन श्रीमती दुर्गा भट्ट जी की कविता:


👭राष्ट्र के आधार हैं बच्चे👭


माना कि कोरोना एक महामारी है,

किन्तु दृढ़ इच्छाशक्ति कब हारी है। 

स्कूल कॉलेज सब बन्द पड़े हैं,

लगती एक लाचारी है।।



लेकिन प्यारे बच्चों के खातिर,

ऑनलाइन पढ़ाई जारी है।

प्यारे बच्चों कोरोना से नहीं है डरना,

हम सबको डटकर है लड़ना।।


बार-बार साबुन से जो धोये हाथ,

कोरोना उसके कभी न आए पास।

दो गज दूरी से करेंगे बात,

खेलेंगे फिर, जीवन भर साथ।।


घर के बाहर मास्क एक हथियार,

सेनेटाइज करें हाथ बार-बार।

चेहरा ना छुएँ बार-बार,

यह भी हो सकता है कोरोना का द्वार।।


तन-मन की हम करें सफाई,

इसी में हम सबकी भलाई।

ताजे फल और सब्जियाँ खाएँ,

 कोरोना को मार भगाएँ।।


करें जो योग हर रोज,

रहें जीवन भर निरोग।

जब प्यारे बच्चों स्वस्थ रहोगे,

तभी तो आप सब मस्त रहोगे।।


 शिक्षक का संसार हैं बच्चे,

राष्ट्र के आधार हैं बच्चे।।


🙏रचना:-

दुर्गा भट्ट (स०अ०)

 रा० आ० प्रा० वि० चोपता

 ब्लॉक-अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग




🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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