ईद मनाऊँ कैसे? - शहाना सैफी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में आज ईदोत्सव के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है जनपद हापुड़ (उत्तर प्रदेश) से शिक्षिका बहिन शहाना सैफी की कविता:-
*ईद मनाऊँ कैसे*?
मैं ईद अब मनाऊँ कैसे?
गले मिलो तो मिलो कैसे।
अजीब कैफियत है ऐसी,
यह वबा आई है कुछ ऐसी।।
खुदा नाराज है हमसे,
आओ तौबा करें सब मिलके।
हर तरफ मौत का मञ्जर,
कुछ लोग हैं अस्पतालों में।।
दुआ हम यह करें ईद में,
रखना इनको हिफाजत में।
ईद का दिन वही होगा,
जब मुल्क में चैन सुकून होगा।।
लरजते होंठ ये बोले,
दुनिया में दहशत का,
माहौल कब खत्म होगा?
मीठी सवैया खिलाऊँ कैसे?
ईद का जश्न मनाऊँ कैसे? ।।
नए कपड़ों से ज्यादा,
कफन बिक रहा है बाजारों में।
हाय! तौबा हो रही है कैसी?
मैं अब ईद मनाऊँ कैसी? ।।
दुनियाँ में खुशियों की खुशबू बसे ऐसे,
मिलकर गले बधाई दें अगले बरस ईद मनाऊँ ऐसे!!
🙏रचना:-
*शहाना सैफी*(शिक्षा मित्र)
प्राथमिक विद्यालय नम्बर 1 नगर क्षेत्र पिलखुआ
जनपद - हापुड़, उत्तर प्रदेश
मोबाइल नंबर 6398184277
🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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