ज्ञान की गंगा-श्री ख्याली दत्त जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में आज प्रस्तुत है जनपद अल्मोड़ा से शिक्षक साथी श्री ख्याली दत्त जी की कविता:-
ज्ञान की गंगा
ज्ञान की गंगा बहे धरा पर,
यह अरमान हमारा है।
ज्ञानवान यहाँ हर बच्चा हो,
यह स्वाभिमान हमारा है।।
यह धरती खुशबू से महके,
ऐसा बाग लगाते हैं।
नन्हे-मुन्ने इन फूलों से,
अपना चमन चमकाते हैं।।
देश प्रेम की जड़ें जमाकर,
ऐसा मंत्र पढ़ाएँगे।
एक अनोखी कला एक दिन
धरती पर बिखराएँगे।।
चारों ओर प्रकाश हो जगमग,
तम थोड़ा भी रहे नहीं।
सभी चलो प्रयास करेंगे,
ले आयेंगे स्वर्ग यहीं।।
ज्ञान के नव प्रकाश से महके,
धरती का कोना-कोना।
कंकड़-पत्थर सभी बनाते,
चलो आज मिलकर सोना।।
सरस मधुरता का स्वर गूँजे,
मनमोहक बागान से।
ज्ञान की खुशबू बहकर जाये,
अपने हिन्दुस्तान से।।
नन्हे-मुन्ने इन फूलों से,
चलो देश चमकाते हैं।
ज्ञान के बदराओं से रिमझिम,
इन पर जल बरसाते हैं।।
ख्याली दत्त (स०अ०)
रा० प्रा०वि० सकनणा
ब्लॉक - सल्ट
जनपद-अल्मोड़ा
🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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