बुद्ध पूर्णिमा-श्रीमती अनिता नौडियाल

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  भगवान गौतमबुद्ध जी की पावन जयन्ती पर प्रस्तुत है जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती अनिता नौडियाल जी की कविता:


बुद्ध पूर्णिमा



पांँच सौ तिरेसठ ईसा पूर्व,

 बैशाख पूर्णिमा आई।

धरा -गगन पर शशि ने,  

निराली छटा  बिखराई।।



राजा शुद्धोधन एवं मायादेवी को, 

मानो मिला वरदान।

एक सुन्दर बालक जन्मा,  

नेपाल में लुम्बिनी स्थान।।


अद्भुत आभा चेहरे पर,

दिव्य कान्ति लिए।

पूरे राजमहल में, 

जगमग करने लगे दिये।।




इस अद्भुत बालक को, 

'सिद्धार्थ' नाम दिया।

आगे चलकर 'गौतम बुद्ध', 

नाम से प्रसिद्ध हुआ।।


राजपाट का मोह छोड़,

सत्य की खोज में चले।

बोधगया में बैठ गये,

एक पीपल के वृक्ष तले।।


जहांँ उन्हें सत्य का ज्ञान प्राप्त हुआ था।

यह बैशाख पूर्णिमा का ही दिन था।।


चार सौ तिरासी ईसा पूर्व, 

बैशाख पूर्णिमा का ही दिन।

कुशीनगर में निर्वाण प्राप्त किया,

अन्तिम सांँसे गिन।।


गौतम बुद्ध माने जाते,

भगवान विष्णु के नौवें अवतार।

इसीलिए इस दिन को, 

पवित्र मानता आ रहा संसार।।


🙏रचना:-

 अनिता नौडियाल (स० अ०) 

रा० प्रा० वि० मैखण्डी मल्ली

ब्लॉक-कीर्तिनगर, टिहरी गढ़वाल



🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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