करुणा - श्रीमती अनीता जोशी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में आज प्रस्तुत है जनपद टिहरी से शिक्षिका बहिन श्रीमती अनीता जोशी जी की कविता:-
करुणा
करुणा से जीवन पोषित है,
करुणा से जीवन शोभित है।
जिसके हृदय में करुणा है,
तन उसका मधुमण्डित है।।
करुणा भाव से उपजी थी,
श्रेष्ठ काव्य की वो धारा।
आदि कवि बन गये वाल्मीकि,
गाते सब उनकी यश गाथा।।
करुण भाव से कण्व ऋषि ने,
पालन किया मेनका सुता का।
जिसका वीर पुत्र भरत ही,
नृप बना भारत धरा का।।
करुण भाव से गुरु नानक ने,
जब सबको गले लगाया।
भूखे सन्तों को दिया निवाला,
ये सौदा सबके मन भाया।।
करुण भाव से सन्त बुद्ध ने,
जीव दया का दिया संदेश।
महावीर चैतन्य प्रभू भी,
करुण भाव से बने जगदीश।।
करुण भाव से कलिंग युद्ध में,
नृप जीती बाजी हार गये।
कभी न युद्ध करने की ठानी,
शान्ति दूत बन अमर हुए।।
इतिहास महान है करुण भाव का,
मानव को ये देता सीख।
दया करुणा का भाव जो रखता,
बन जाता वो सबका ईश।।
श्रीमती अनीता जोशी (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० तिमली
ब्लॉक-नरेन्द्र नगर, टिहरी गढ़वाल
🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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