आशा के फूल-श्रीमती अमिता क्वीरा
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती अमिता क्वीरा जी की कविता:
आशा के फूल
पीठ में बस्ता संग में साथी,
जब हम जाते थे स्कूल।
वो भी कितने सुन्दर दिन थे,
कहीं पड़ ना जाये उनमें धूल।।
ईश वन्दना करके हम सब,
सुन्दर करते थे व्यायाम,
तन और मन को खुश रखने के,
पूरे होते सारे आयाम।।
आनन्दम् के अन्तर्गत हम,
करते अनेक गतिविधियाँ,
अन्जाने में ही पा जाते,
जीने के कौशल की निधियाँ।।
पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से,
हो जाता विषयों से मेल,
सीखने के प्रतिफलों तक पहुँचना,
लगता था सब जैसे खेल।।
एक किरण है उम्मीदों की,
मन में हैं आशा के फूल,
जल्दी ही पीठ में बस्ता होगा,
हम सब जायेंगे स्कूल।।
श्रीमती अमिता क्वीरा (प्र०अ०)
रा०प्रा०वि०अमृतपुर
वि०ख० -भीमताल, जिला-नैनीताल
🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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