जगत जननी-श्रीमती आभा भैंसोड़ा

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में बैशाख शुक्ल नवमी पावन पर्व पर प्रस्तुत है जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती आभा भैंसोड़ा की कविता:


🙏 जगत जननी

 

मिथिला देश के राजा जनक महान,

चिंतित थे बहुत पड़ने से अकाल।

ऋषि आशीष से हल चलाकर,

 कन्या पा गए सीता महान।।



जनक नन्दिनी कहलाई जानकी,

मिथिला कुमारी से कहाई मैथिली।

भूमि से जन्मी, तो भूमिजा कहलाई।

हल जोत के पाया वृषभानु कहलाई।।


पुनौराधाम जिला सीतामढ़ी  में,

प्राकट्य तुम्हारा स्थान है माता।

मिथिला का हर जन हर घर में, 

अतिशय बल रूप में पूजा जाता।।


जगत जननी हो जानकी माता, 

जनक नन्दिनी अति सुख दाता। 

प्राकट्य दिवस है आज तुम्हारा, 

मन अतिशय मेरा हर्षाता।।


🙏रचना:-

डॉ० आभा सिंह भैसोड़ा (स०अ०)

रा० प्रा० वि० देवलचौड़

हल्द्वानी, नैनीताल



🙏संकलन :-टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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