मुसीबतों का सागर-श्रीमती रेखा रावत

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद रुद्रप्रयाग  से शिक्षिका बहिन श्रीमती रेखा रावत  जी की कविता:

मुसीबतों का सागर 

महामारी की दूसरी लहर से, 

स्तब्ध सारा देश है। 

लगता है ये बहरूपिया है, 

इसका न कोई वेश है।। 

        


क्या करें, क्या ना करें? 

सब कुछ समझ से बाहर है। 

ये बस एक वाइरस नहीं है, 

ये तो मुसीबतों का सागर है।। 


ये आता है, जाता है, 

और जाकर फिर आ जाता है। 

ऐसे भी क्या किसी के घर में, 

कोई बिन बुलाये जाता है?


मास्क पहनना और हाथ धोना, 

ये ही इसका बचाव है। 

और सामाजिक दूरी रख कर, 

सबका करना रख-रखाव है।। 

  

अनदेखी और लापरवाही न करना, 

ये हम सब की जिम्मेदारी है। 

नियमों का पालन करना ही

महामारी पर भारी है।।




🙏 रचना:रेखा रावत  (स०अ०)

रा० प्रा० वि० तिमली भरदार

ब्लॉक-जखोली, जनपद-रुद्रप्रयाग



🙏संकलन :-टीम हिम मन मन्थन,  उत्तराखण्ड

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