बुद्ध पूर्णिमा-श्रीमती ललिता जोशी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद पिथौरागढ़ से शिक्षिका बहिन श्रीमती ललिता जोशी जी की कविता:
*बुद्ध पूर्णिमा*
मास था बैशाख पावन दिन पूर्णिमा,
धर्म गा रहा इस दिन की पावन महिमा।
इसी दिन जन्मे धरा पर थे प्रबुद्ध,
बोधित्व प्राप्त कर बने भगवान बुद्ध।।
भारत की पावन धरा पर जन्म लेकर,
जीवन के मूल रहस्य किये उजागर।
भू पर सामान्य नर का रूप लेकर,
बौद्ध धर्म को आध्यात्म की ऊँचाई देकर।।
वास्तविक नाम था सिद्धार्थ उत्तम,
गौतमी के पालन से कहलाए गौतम।
कर्मफल में था अटल विश्वास उनका,
दस आज्ञाओं के पालन से था सरोकार उनका।।
दूर रहने को कहा हत्या, चोरी,
झूठ और दोषारोपण से।
दुराचार, लालच, घृणा, अज्ञान,
निंदा और अपवित्र भाषण से।।
महामारी के इस दौर में आओ,
उनका आभार करें।
बुद्ध पूर्णिमा के पावन उद्देश्य को,
सब मिलकर साकार करें।।
ललिता जोशी (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० पुगौर
ब्लॉक-मूनाकोट, पिथौरागढ़
🙏संकलन :- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड


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