बुद्ध पूर्णिमा-श्रीमती किरन नैथानी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  भगवान गौतमबुद्ध जी की पावन जयन्ती पर प्रस्तुत है जनपद पौड़ी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती किरन नैथानी जी की कविता:


बुद्ध पूर्णिमा





भगवान बुद्ध का जन्म दिवस,

बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार।

गौतम बुद्ध के रुप में,

विष्णुजी का नौवाँ अवतार।।



जग में देख जरा, व्याधि, दुख,

मन हुआ बहुत हताश।

वैरागी मन रुका न महल में,

ज्ञान की करने लगे तलाश।।


बोधगया में की कठिन तपस्या,

 लगा वहीं पर ध्यान I

दिव्य ज्ञान की प्राप्ति से,

सिद्धार्थ गौतम बने भगवान।।


जीवन चक्र को जाना,

जग को समझाया यथार्थ ज्ञान।

धर्य, करुणा, सत्य, सेवा, दया,

नैतिकता से हटे अज्ञान।।



सम्यक्‌ कर्म, सम्यक् वचन,

सम्यक् ज्ञान, सम्यक् स्मृति।

सम्यक् ध्यान, सम्यक्‌ प्रयास,

रहे सबकी सम्यक् दृष्टि।।


आत्म अनुभव बिखेरे दुनियाँ में,

प्रासंगिक हैं उपदेश,

पशुबलि की घोर निन्दा की,

अहिंसा का दिया संदेश।।


दीक्षा से हो गया,

सम्राट अशोक का जीवन परिवर्तित।

प्रायश्चित कर बनाया,

अपने जीवन को आध्यात्मिक।।


 बुद्धपूर्णिमा के दिन हुआ,

जन्म, ज्ञान और महाप्रयाण।

वैशाख पूर्णिमा पावन दिन है,

करें जप, तप, दान, ध्यान।।


किरन नैथानी ( प्र० अ०)

रा०उ०प्रा०वि० नगर क्षेत्र श्रीनगर 

वि० क्षेत्र - खिर्सू, पौड़ी गढ़वाल




🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुंदर शब्दों से सजाया है मैम आपने इस कविता को जिसमे आपने भगवान गौतम बुद्ध जी के जीवन को बहुत ही प्रेरणा स्रोत बताया है। काश आज के समाज में लोग बुद्ध जी के जीवन से कुछ शिक्षा लेते तो समाज में बहुत बड़ा परिवर्तन आ सकता है।

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