श्री नृसिंह जयन्ती-श्रीमती सुषमा नेगी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्री नृसिंह जयन्ती पावन पर्व पर प्रस्तुत है जनपद देहरादून से  शिक्षिका बहिन श्रीमती सुषमा नेगी जी की कविता:



🙏🕉️श्री नृसिंह जयन्ती



विष्णु ने प्रहलाद बचाने को, 

लिया नृसिंह अवतार। 

आधा नर-आधा सिंह का वेश, 

प्रभु ने धरती पर दिया उतार।। 



पुत्र रूप में हिरण्यकश्यप ने, 

भक्त प्रह्लाद को पाया।

पुत्र बना विष्णु भक्त,

जो असुर को तनिक न भाया।।


पिता के अत्याचारों का, 

प्रहलाद विरोध करता था। 

उसका विष्णु भक्ति का भाव, 

हिरण्यकश्यप को स्वीकार न था।। 


भक्ति-भाव मिटाने को, 

कई जुल्म प्रहलाद पर ढाये। 

हर जुल्म पर पर बच गया, 

जब संकट उस पर आये।।


क्षुब्ध होकर अग्नि में, 

होलिका की गोदी बिठाया। 

होलिका तो जल गई,

 प्रह्लाद वापस आया।। 



हिरण्यकश्यप बोला गुस्से में, 

तेरा भगवान कहाँ है?

प्रह्लाद बोला विनम्र भाव से, 

वो तो सभी जगह है।।


इस खम्भे में भी बोलो, 

क्या भगवान तुम्हारा है?

हाँ सुनकर प्रह्लाद से, 

हिरण्यकश्यप फिर से हारा है।। 


क्रोधान्ध हिरण्यकश्यप ने,

खम्भे पर जोर से वार किया। 

खम्भे से प्रगट हो कर, 

 प्रभु ने नृसिंह अवतार लिया।।


🙏रचना:-

सुषमा नेगी(स०अ०) 

रा० प्रा० वि० आर्यनगर

 काठबंगला, नगर क्षेत्र देहरादून




🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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