अन्तर्राष्ट्रीय माउण्ट एवरेस्ट दिवस-श्री मनोज घिल्ड़ियाल
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में माउण्ट एवरेस्ट विजय दिवस पर प्रस्तुत है जनपद पौड़ी गढ़वाल से शिक्षक साथी श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी की कविता:
अन्तर्राष्ट्रीय माउण्ट एवरेस्ट दिवस
संस्कृत में देवगिरि पर्वत कहते जिसको,
नेपाली में सागर माथा कहते उसको,
तिब्बत में में पर्वतों की रानी जो है,
दुनिया की पर्वत चोटी सबसे ऊँची वो है।।
8848मीटर मानक ऊंँचाई बताया जिसने,
नेपाल से चीन तक लोकेशन बताया उसने।
वे ब्रिटिश जियोग्राफर जार्ज एवरेस्ट हैं,
उन्हीं के नाम पर यह माउण्ट एवरेस्ट है।।
हिलेरी व तेनजिंग नोर्गे सबसे पहले थे वो,
29 मई 1953 को इस चोटी पर चढ़े थे जो,
प्रत्येक पर्वतारोही का एवरेस्ट विजय लक्ष्य है,
एवरेस्ट पहुंँचने से पहले उसे न रेस्ट है।।
2008 में एडमण्ड हिलेरी के निधन के बाद,
नेपाल द्वारा उन्हें किया जाता है याद,
29मई प्रतिवर्ष इस मौके पर कार्यक्रम होते हैं।
अन्तर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस जिसको कहते हैं।।
मनोज घिल्डियाल (स०अ०)
रा० प्रा ०वि०कलीगाड
ब्लॉक - रिखणीखाल
पौड़ी - गढ़वाल
🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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