धूम्रपान के दुष्प्रभाव - श्री मनोज घिल्ड़ियाल
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद पौड़ी गढ़वाल से शिक्षक साथी श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी की कविता:
धूम्रपान के दुष्प्रभाव
कभी बीड़ी सिगरेट तो कभी हुक्का गुड़गुड़ाते हैं,
कभी हीरो सी नकल कर धुएँ के छल्ले बनाते हैं।
कभी खैनी रगड़कर हथेली पर चुटकी बजाते हैं,
कभी गुटके की थैली को फाड़ स्टाइल से खाते हैं।।
बीड़ी सिगरेट पीकर औरों को परेशान करते हैं,
खाकर गुटखा जगह-जगह गन्दगी करते हैं।
पहले-पहले खूब उड़ाया धुआँ और पैसा शौक में,
फिर बीमारी से बचने को पैसा लगाया इलाज में।।
घर भर को बीड़ी की चिनगारी आग लगा देती,
लाखों की वन सम्पदा को धूम्रपान राख कर देती।
वातावरण को इसका धुआंँ प्रदूषित करता है,
वन्य जीव वनस्पति को भी प्रभावित करता है।।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तब विचार किया,
तम्बाकू के प्रचार-प्रसार विज्ञापन को प्रतिबन्ध किया।
३१मई प्रतिवर्ष जागरूकता संकल्प लिया जाएगा,
विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाया जाएगा।।
🙏रचना:-
मनोज घिल्डियाल (स०अ०)
रा० प्रा० वि० कलीगाड
ब्लॉक - रिखणीखाल, पौड़ी-गढ़वाल
🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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