प्रभञ्जन - श्री राकेश असवाल जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद-रुद्रप्रयाग से शिक्षक साथी श्री राकेश असवाल जी की कविता:
प्रभञ्जन
कोई दुख से जो हो व्याकुल,
शीतलता से रिझाना।
अमर्श से जो निखित पूर्ण हो,
सुकून देकर उसको मनाना।।
स्पृहा से हो लोलुप कोई,
दानशीलता उसे सिखाना,
कृपण कोई हो संवेदना से,
इससे उसको बगलियाना।।
मातृ सन्ताप से हो व्याकुल कोई,
छूकर उसे गले लगाना।
अनुराग देकर व्यथित क्लान्त को,
यूँ ही शान्ति से समझाना।।
प्रीति से जो अलग थलग हो,
सह माधुर्य जीवन में जाना।
दुखित कोई सम्पदा से हो,
परिश्रम सहित उसे जगाना।।
आनी कोई जिरह करता पथ में दिखे,
बोध प्याला पिलाना।
तृषित कोई राह तर-बतर हो,
तोय प्याला दिखाना।।
विकलामग जन हो डगर में कोई,
सहारा देकर उठाना।
हे बयार तू आहिस्ता चलना,
अच्छाई को बहाना।।
कवि राकेश की स्वपनिल धरा को,
देवदूति सा सजाना।।
🙏रचना :-
राकेश असवाल (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० पाली
ब्लॉक - अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग।
🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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