विश्व बाल श्रम दिवस-श्रीमती सरोज डिमरी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में बाल श्रम दिवस पर प्रस्तुत है  जनपद-चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी की जी की कविता:


विश्व बाल श्रम निषेध दिवस


जीवन यापन के लिए,

बालश्रम जो करते हैं।

कुपोषण का शिकार बनते,

दीन-हीन बन जाते हैं।।



बाल श्रम गरीबी नहीं,

गरीबों का शोषण है।

इससे गरीबी मिटती नहीं,

और ना होता पोषण है।।



प्राकृतिक संसाधन परिपूरित,

विश्व धरा है भूमि हमारी।

बंजर रहने पर भी यह

स्वयं को परिपूर्ण बनाती।।


जिम्मेदार माँ-बाप सदा ही,

अपने बच्चों के हित जीते हैं।

आत्मनिर्भर स्वस्थ समाज-हित,

 जीवन को जीते हैं।।


बच्चे राष्ट्र की संपत्ति होते हैं,

हैं समाज की अमूल्य धरोहर।

इनका संरक्षण-संवर्द्धन ,

है हम सबकी जिम्मेदारी।।


बच्चा बालश्रम करता यदि दिखे,

कोई विद्यालय की राह दिखाना।

बाल श्रम से बच्चों को रोक,

मानवता का धर्म निभाना।।


   सरोज डिमरी (स० अ०)

रा० आ० उ० प्रा० वि० गौचर

कर्णप्रयाग, चमोली




🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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