महाराणा प्रताप - श्रीमती सुनीता भटनागर

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन  में महाराणा प्रताप जी की पावन जयन्ती  पर प्रस्तुत है जनपद-नैनीताल  से शिक्षिका बहिन श्रीमती सुनीता भटनागर जी की कविता:


🏹महाराणा प्रताप🏹


       

पराक्रम, पुरुषार्थ, निडरता,

 जिनके पर्याय बने।

भारत में महाराणा प्रताप महान,

बलशाली राजा हुए।।



एक अजब शान, एक निडर आन,

जिनका रूप निराला था।

मस्तक था ओज से परिपूर्ण,

वह बाँका वीर महाराणा था।।


80 किलो का कवच जिनका,

80 किलो का भाला था।

कवच, ढाल, तलवार, भाले का,

कुल वजन 207 किलो हो जाता था।।


भय से सहमा अकबर भी,

आधा हिन्दुस्तान देने को तैयार था।

पर स्वाभिमानी राणा को,

स्वतन्त्रता से प्यार था।।



हल्दीघाटी के युद्ध में मुगल,

सहमे-सहमे से रहते थे।

इस महाप्रतापी राजा को हम,

महाराणा प्रताप कहते थे।।


यमराज स्वयं बन जाते थे जब,

अपने घोड़े चेतक पर चढ़ते थे।

क्षत-विक्षत दुश्मन हो जाते थे,

नरमुण्ड हवा में उड़ते थे।।


जिनकी गरज, गरजते बादल सी,

और तलवार चमकती बिजली सी।

एक अजब चमक और फुर्ती थी,

रग-रग में देशभक्ति झलकती थी।।


विष-बीज मातृभूमि में बोने दिया नहीं,

सन्देश यही बँटने पाये न देश कभी।

शत-शत नमन इस वीर प्रतापी को,

भारत माँ के लाल महाराणा प्रताप बलशाली को।।


सुनीता भटनागर (प्र० अ०)

रा० प्रा० वि० पनिया मेहता

 ब्लॉक-भीमताल, नैनीताल





🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

होली - श्रीमती सुशीला थपलियाल

माँ तुम - श्रीमती वन्दना जोशी

गौचर मेला-श्री सरोज डिमरी