कन्धे का बस्ता - श्रीमती हेमलता बहुगुणा
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद-टिहरी-गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती हेमलता बहुगुणा जी की कविता:
👭कन्धे का बस्ता 👭
एक दिन चुन्नू दौड़ी आई,
अपने बस्ते के पास।
भैया मेरे मुझे बताओ,
तुम इतना क्यों हो उदास?
लगा रोने जोर-जोर से,
दुःख हो रहा मुझको आज।
सुबह-शाम कन्धे पर सजता,
कोने पर पड़ा हूँ मैं आज।।
जब पढ़ने की बातें होती,
किताबें बाहर-अन्दर होती।
यह देख कर खुशियाँ होती,
जब ज्ञान की बातें होती।।
छुट्टी का जब समय आता,
झट मैं सबके कन्धे चढ़ जाता।
घर जाने को सब तैयार,
बस्ता झूले आर से पार।।
चुन्नू बोली मत रो भैया,
वो दिन जल्दी आयेगा।
झूम-झूम कर रोज-रोज,
तू कन्धे पर स्कूल जायेगा।।
🙏रचना :-
श्रीमती हेमलता बहुगुणा
(सेवानिवृत्त प्र०अ०)
चम्बा, जिला-टिहरी गढ़वाल
🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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