बरसात-श्रीमती प्रतिभा पन्त

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-पिथौरागढ़ से शिक्षिका बहिन श्रीमती प्रतिभा पन्त जी की कविता:



बरसात 


आ गई बरसात अम्मा, 

ला दो मुझको छतरी। 

बड़ी नहीं छोटी नहीं, 

गोल ‌गोल छतरी।। 



लाल नहीं पीली नहीं, 

हरी नहीं नीली नहीं

भागई मुझको अम्मा, 

सतरंगी छतरी।। 


जाऊंँ जब स्कूल अम्मा, 

ओढूंँ तब सतरंगी छतरी।

सब सखियों के मन को भायी, 

मेरी प्यारी सतरंगी छतरी।। 


धूप हो या बारिश अम्मा, 

काम आये छतरी।

गरमी और बरसात से, 

अम्मा हमें बचाये छतरी।। 



धूप से बचाये अम्मा, 

धूल से बचाये। 

बरसे चाहे आसमाँ से, 

काली-काली बादरी।।


आ गई बरसात अम्मा, 

ला दो मुझको  छतरी।।


    

🙏रचना :-

 प्रतिभा पन्त (प्र०अ०) 

रा० प्रा० वि० जगथली

ब्लाक-  बेरीनाग

जनपद- पिथौरागढ़


🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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