योग हरे रोग - श्रीमती सन्नू नेगी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन पर्व पर प्रस्तुत है जनपद-चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सन्नू नेगी जी जी की कविता:
योग दिवस पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ! 💐💐💐💐💐💐💐
🧎योग हरे रोग🧎
सुन्दर शरीर बनाएँगे, रोगों को दूर भगाएँगे।
नित योग और प्राणायाम जब अपनाएँगे।
प्राणों का आयाम है, साँसो का निज ध्यान।
निरोगी बने काया, तभी जीवन का मान।।
पुरखों की आन, ऋषि पतंजलि का वरदान है,
करो योग पर मान, संस्कृति की यह पहचान है।
साँसो से साँसें जुड़ती, बन जाते हैं प्राणायाम,
शरीर को स्वस्थ बनाते, योग के कई आयाम।।
सुन्दर सुडौल, गठीला बन जाता है तन,
मानसिक शान्ति देता, स्वस्थ हो जाता मन।
घर-घर योग की लहर हो, सुबह-शाम के पहर हो,
नित आदत में सम्मिलित गाँव-गाँव और शहर हो।।
शान्त भाव अनुलोम विलोम कपालभाति है अचूक,
प्रथम प्राणायाम भस्त्रिका जोर जोर से साँसें फूक।
बाह्य प्राणायाम कर रेचक से मन शान्त करे भ्रामरी,
कण्ठ व्याधि उज्जायी से उद्गीथ स्मरण शक्ति बढ़ाए हमारी।।
सूर्य भेदी और चन्द्र भेदी ये भी हैं प्राणायाम,
योगासनों के साथ-साथ याद रखो सबके नाम।
प्रणव ध्यान हो अन्त में मन मष्तिष्क को शान्त करे,
ब्रह्मानन्द की प्राप्ति आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करे।।
🙏रचना :-
सन्नू नेगी (स० अ०)
रा० क० उ० प्रा० वि ० सिद्दोली
क्षेत्र-कर्णप्रयाग, चमोली
उत्तराखण्ड
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड


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