योग दिवस मनाएँगे-श्रीमती किरन जोशी जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-टिहरी गढ़वाल  से शिक्षिका बहिन श्रीमती किरन जोशी जी की कविता:



योग दिवस मनाएँगे

 

जब से ईश्वर ने जीव जन्तु और मनु रूप बनाया, 

तपस्वियों ने तब योग का परचम फैलाया।

पंचतत्व को समझे जब वो ऋषि-मुनि,

फिर पतञ्जलि ऋषि ने जन मानस को समझाया।।



रोग, व्याधि, दुख, दरिद्रता सब दूर रहें,

हम तुम सब मिल स्वस्थ और मजबूत रहें।

खाना, पानी, हवा, ताप, मिट्टी  सब मिलता है,

धरती माता पूजित है सब देती है।।


हमारी संस्कृति और वसुधा की रीति निराली है,

जब सविता भी पूरब से शीघ्र उदय होते हैं।

इस दिन धरा प्रसन्न हो सूर्य मुख झुक जाती है, 

फिर अलौकिक छवि को निरख स्वास्थ्य बढ़ाते हैं।।


इस वसुन्धरा का सौन्दर्य हम बढ़ाएँगे, 

हरा भरा कर इसे व सबको स्वस्थ  बनाएँगे।

जब हरियाली से पूर्ण व स्वच्छ ये धरती होगी,

फिर सब योगासन कर, योग दिवस मनाएँगे।।


🙏रचना- किरण जोशी (प्र०अ०) 

 रा० प्रा० वि० मैखण्डी मल्ली                                                          ब्लाॅक- कीर्ति नगर, टिहरी गढ़वाल


🙏संकलन:टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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