आत्मविश्वास-श्रीमती लता आर्य जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती लता आर्य जी की कविता:


आत्मविश्वास



समय, मौसम, परिस्थिति कौन नहीं ,

जो हमारे आत्मविश्वास को  परखता है।

अगर निष्ठा पूर्वक कार्य हो तो,

ये हमारे समर्पित भाव को और बढ़ाता है।।



जब विश्वास ही हमारा ध्येय हो,

स्वयं पथ के पत्थर ढेर हो सकते हैं।

दृढ़ संकल्प से ही हम,

उस कार्य को पूर्ण कर सकते हैं।।


जो हमारे जीवन में खुशियों के भरे रंग,

वो जरूर मिटा पायेगा कई भ्रम।

अगर सोच का संकल्प हो महान,

तभी हो सकता है, हर समस्या का समाधान।।


बड़ी सोच का बड़ा कमाल,

जीत से ही ईनाम समर्थ होता है।

अगर ये आत्मविश्वास कम हो जाये तो,

अनमोल समय भी व्यर्थ हो जाता है।।



🙏रचना:-

लता आर्य (प्र०अ०)

रा० प्रा० वि० मनोरा

वि० ख०- भीमताल

जिला- नैनीताल

उत्तराखण्ड



🙏संकलन:टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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