मेरे पापा-श्रीमती नर्वदा कौशल जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद-टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती नर्वदा कौशल जी की कविता:
मेरे पापा
घर से लेकर,
दिल में रहना पापा।
मेरी खुशियों के लिए,
गम भी सहना पापा।।
तुम किसी भी हाल में रहो,
कभी भी, कहीं भी।
मैं तुम्हारे साथ हूँ,
बस यही कहना पापा।।
मैं चलता हूँ तुम्हें देखकर,
तुम जीते हो मुझे देख कर।
भरोसे के समन्दर में,
यूँ ही बहना पापा।।
तुम्हारे लिए मैं हर गम भी सहूँगा,
बेटा हूँ तुम्हारा बस यही कहूँगा।
अगर मैं बिगड़ भी जाऊँ,
तो सम्भालना मुझे हर कदम पर पापा।।
अगर मैं बदल जाऊँ कभी।
तो दिल से निकाल मत देना पापा।।
🙏रचना:-
नर्वदा कौशल (स०अ०)
रा० प्रा०वि० नकोट (जुवा)
ब्लॉक- थौलधार
जनपद - टिहरी गढवाल
🙏संकलन:टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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