एहसास-श्रीमती दमयन्ती राणा

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती दमयन्ती राणा जी की कविता:


"एहसास"


हर आने वाला पल अतीत बन जाता है,

किसे पता कब,क्या बदल जाता है। 

रह जाते हैं तो बस बीते पलों के कुछ एहसास,

जीवन की किताब के कुछ अनमोल एहसास।। 



पल-पल में ही पल बदल जाते हैं,

हर बदले पल के साथ एहसास बदल जाते हैं। 

जाने क्यों पल भर में ख्याल बदल जाते हैं,

और रह जाते हैं तो बस बीते पलों के एहसास।। 


शायद इसी तरह लोग बदल जाते हैं,

इसी तरह दुनिया के समाज बदल जाते हैं। 

पल-पल में बदलती इस छोटी सी दुनिया में,

रह जाते हैं तो सिर्फ कुछ एहसास बीते पलों के।। 


बहुत ही खूबसूरत है एहसास की खुशबू, 

जितना भी सोचते हैं उतना ही महक जाते हैं। 

एहसास ही मनुष्य को एक दूजे से जोड़े रखता है,

एहसास के बिना हर लम्हा अधूरा लगता है।। 



                      

 🙏 रचना:-

     दमयन्ती राणा (स०अ०)

रा० उ० प्रा० वि० ईड़ाबधाणी                                                ब्लाॅक- कर्णप्रयाग, चमोली



🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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