प्रकृति का सन्देश - श्रीमती पुष्पा तिवारी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन  में  प्रस्तुत है जनपद-चम्पावत  से शिक्षिका बहिन श्रीमती पुष्पा तिवारी जी की कविता:


🏞️🌳प्रकृति का सन्देश🏞️🌳


जिस प्रकृति ने सब कुछ दिया,

उसके साथ हम क्या कर रहे हैं?

क्या हम प्रकृति के साथ,

सही व्यवहार कर रहे हैं?



वनों को काटकर बड़ी-बडी,

इमारतें खड़ी कर रहे हैं।

जंगलों को नष्ट कर प्रकृति से,

यह कैसा खिलवाड़ कर रहे हैं।।


जीने को हमें जीवन दिया,

रहने को घर, पीने को पानी दिया।

खाने को अन्न, शीतल छाया,

प्रकृति ने हमें क्या नहीं दिया?


वृक्षों से भरा वन दिया,

प्राणवायु का वर दिया।

सूर्य का प्रकाश दिया,

दिन-रात का अन्तर दिया।।


पंचतत्वों से बना मानव, 

तू क्यों अभिमान करता है?

प्रकृति ने तुझे क्या नहीं दिया,

फिर तू क्यों दम्भ भरता है?


🙏रचना:-

पुष्पा तिवारी

रा०उ०प्रा०वि०आमबाग

टनकपुर, चम्पावत

संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड 

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