सन्तुलित आहार-श्री अश्विनी गौड़

📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-रुद्रप्रयाग से शिक्षक साथी अश्विनी गौड़ जी की गढ़वाली कविता:

सन्तुलित आहार

खान पान अर पोषण मा, 
यु ध्यान धन पूरु जी। 
संतुलित हो आहार हमारू, 
या बात भौत जरूर जी।।



  (भोजन का अवयव छिन पांच)

तागत अर तुरंत ऊर्जा, 
कार्बोहाइड्रेट देंदा। 
मिट्ठी चीजों अन्न फसल मा, 
भरपूर कीटी तैं रैन्दा।। 

आलू ग्यूँ अर चौंळ भात मा, 
कोदा झंगोरा जौ का साथ मा। 
चीनी गुड़ या मिट्ठि चीजों मा, 
कार्बोहाइड्रेट रळ्यूँ मिल्यूँ च।।

दाळ, चना, राजमा, छेमी, 
अरहर, तोर, गौथ, मसूर। 
भट्ट रैंस काळीदाळ, 
दै पनीर च्यूँ-मशरूम।। 

शरीर रचौण बणौण मा यौ, 
प्रोटीन मिलदू यूंमा भरपूर।। 

घर्या राडू़ घ्यू बादाम, 
 घर्या तिलों कु तेल आम। 
वसा फैट चर्बी मा धर्दा, 
शरीर तागत जमा करि रखदा।। 

हरीं भुज्जि या मौसमी फल, 
आम अखोड़ किशमिश तरबूज। 
संतरा, निंबू, नारंगी, आड़ू, 
विटामिन कु योंमा धारू।। 

रोग शरीर नजीक ना औ, 
स्वस्थ हौंसिया मुखडी़ रौ।
विटामिन खाणौ मा ल्यैंदि रा, 
हर दिन फल सब्जी खान्दि जा।। 

(खनिज लवण का काम अनेक)

रोग शक्ति तैं बढ़ौण मा, 
खाणौ तैं पचौण मा।
हड्डी मजबूत कन, 
शुद्ध स्वस्थ तन-मन।। 

धर्ती प्यौट माटा मा रैक, 
खनिज लवण का काम अनेक।। 

आयरन खूनै कमि से बचौंदू, 
लोखरै कढ़ै मा खाणौ बणौण।
हरी सब्जी कफलू-धेपिली, 
कोदै रोटी खान्दी रौण।। 

खाणौ मा जु कैल्सियम हो, 
शरीर मजबूत टकटकु रौ। 
दूध दै अण्डा पनीर, 
हड्डी तैं मजबूती द्यौ।। 


लोण हो आयोडीन वाळु, 
स्वस्थ हो हर खाणौ कौळु। 
घेंघा रोग कभि नि हो, 
स्वस्थ हौंसिया शरीर रौ।। 

खाणौ प्यौणौ यन समृद्ध हो, 
जै मा पोषक तत्व मिल्यूं रौ। 
कुपोषण की जकड़ से, 
सैरि कुटुम्बदरि मुक्त हो।। 

🙏रचना:-
अश्विनी गौड़ (स०अ० विज्ञान)
 रा०उ० मा०वि० पाला कुराली 
ब्लॉक-जखोली,  रुद्रप्रयाग



🙏संकलन:टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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