वह लड़की याद आती है-श्री दीवान सिंह कठायत

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-पिथौरागढ़ से शिक्षक साथी दीवान सिंह कठायत जी की कविता:


वह लड़की बहुत याद आती है


घर के सारे काम निपटाकर, 

जो समय से स्कूल को जाती है।

जिम्मेदारी निभाकर पढ़ाई करती,

वह लड़की बहुत याद आती है।। 



अपना बैग लटकाए कन्धों पर, 

भाई-बहिनों का भी सम्भाले रहती है। 

पकड़ अंगुली सुरक्षित ले जाती उनको, 

वह लड़की बहुत याद आती है।। 


भैया-बहिनों को उत्साहित कर,

साथ उनके भाव विभोर हो खेलती है।

खुशी के खातिर उनकी जीतकर भी हार जाती, 

वह लड़की बहुत याद आती है।।


माँ की व्यस्तता से वाकिफ होकर, 

अपना पढ़ना रोक जो रोटी बेलने लग जाती है। 

जूठे बरतन छोटे हाथों धोए नित -नित 

वह लड़की बहुत याद आती है।। 


पिता की पंगु आर्थिकी महसूस कर, 

अपने पैरों खड़े होने के सपने बुनती है। 

हम भी पढ़कर बड़े बन जाए जो सोचे,

वह लड़की बहुत याद आती है।।


🙏रचना:-

दीवान सिंह कठायत (प्र०अ०)

रा० आ० प्रा० वि० उडियारी

 वि०ख०- बेरीनाग, पिथौरागढ़




🙏संकलन:टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

  1. सहज एवम भावपूर्ण कविता प्रस्तुटुकरण क् लिए कठायत जी को साधुवाद।

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