प्रकृति - श्रीमती ज्योति साह जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में विश्व पर्यावरण दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है जनपद नैनीताल से से शिक्षिका बहिन श्रीमती ज्योति साह जी की कविता:

               

🌍प्रकृति 🌍

ये प्रकृति है, अनमोल धरोहर,

इसकी रक्षा हम करें निरन्तर।

प्रकृति में हैं उपहार ही उपहार,   

कभी देती वह ऋतुएँ उपहार।।



कभी देती वह उपहार में फल-सब्जी,

कभी देती वह वस्तुएँ हर जरूरत की।

देती वह प्राण वायु हरपल, 

प्रकृति को करो नमन पल-पल।।  


मानवता का यही धर्म अपनाओ, 

वृक्ष लगाओ, जल जीवन बचाओ।

ये इसका करें हम सम्मान,    

नहीं तो होगा सब ओर विनाश।।  


कभी आयेगी बेमौसम बारिश बाढ़ भारी,

कभी होगी बेमौसम बर्फ बारी।

गर्मी होगी इतनी अधिक,

सह न पायेंगे हम सब जन।। 

 

और भी हैं इसके नुकसान भाई,

नहीं मिलेगा पीने को पानी।

इस कारण होगी लड़ाई,

सारे जग में हो रही बीमारी।


सारे जग में हो रहा हाहाकार,

 सब ओर फैली है महामारी।

 प्रकृति रहेगी तभी मानव है,  

 तभी रहेंगे सभी जीवधारी।।


अभी वक्त है जागो प्यारे,

प्रकृति पर्यावरण बचाओ सारे।     

वृक्ष लगाओ, करो न दोहन, 

प्रकृति से ही है सारा जीवन।।           

 

प्रकृति देगी हमें वरदान,

स्वस्थ रहें, सारा संसार। 

इसको सँवारे हम निरन्तर,

प्रकृति है अनमोल धरोहर।।             


🙏रचना:- 

 ज्योति साह (प्र०अ०)

रा० प्रा० वि० गेठिया

ब्लॉक - भीमताल, नैनीताल




🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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