रिश्ते- श्रीमती नमिता शर्मा
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद-नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती नमिता शर्मा जी की कविता:-
रिश्ते
किसी का खेल होते हैं,
किसी का दिल सजाते हैं।
जहाँ में अपने बनकर के,
छला करते हैं क्यों रिश्ते?
किसी की जिन्दगी बनकर,
कुछ लम्हे गुजरते हैं।
कहीं दुनिया से लड़ कर भी,
पला करते हैं क्यों रिश्ते?
जिगर का दर्द बनते हैं,
लहू में बस ही जाते हैं।
कभी पलकों को यादों से,
भिगो जाते हैं क्यों रिश्ते?
कहीं साँसों में बस कर,
साँस को ही तोड़ देते हैं।
यह कैसा रूप लेते हैं,
बदल जाते हैं क्यों रिश्ते?
कोई खुद ही भुलाता है,
किसी को भूल जाते हैं।
यहाँ पर रेत बनकर हाथ से,
फिसल जाते हैं क्यों रिश्ते?
किसी के दम्भ का विश्वास,
और फिर आस बनते हैं।
मगर सब भूलकर अक्सर,
बिखर जाते हैं क्यों रिश्ते?
🙏रचना:-
श्रीमती नमिता शर्मा (स०अ०)
रा० आ० प्रा० वि० मेहरागाँव
वि०ख०- भीमताल
जिला- नैनीताल
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

Oh my god this is so beautiful and deep, just loved it.
जवाब देंहटाएंYou're amazing ❤️ please continue
It's amazing
हटाएंAti sundar kavita
बहुत बहुत सुंदर कविता दिल को छूने वाली
हटाएंWhat an amazing poetry❤️
जवाब देंहटाएंYou should write more often
बहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंवाह! नमिता बहुत और सुंदर सत्य bhav! ☺👌
जवाब देंहटाएंReally great maam. Heart touching poem. 👍👍🌹
जवाब देंहटाएंNice poetry, like it very much. Keep it up.
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