विश्व जनसंख्या नियन्त्रण दिवस - श्री हरीश कोठारी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में विश्व जनसंख्या नियन्त्रण दिवस पर प्रस्तुत है जनपद-पिथौरागढ़ से शिक्षक साथी श्री हरीश कोठारी जी की कविता :-
🌍विश्व जनसंख्या नियन्त्रण दिवस
आज नहीं तो कल को,
निश्चित होगी हाहाकार।
अगर नहीं रखा हमने,
सीमित अपना परिवार।।
खाने को नहीं भोजन होगा,
पीने को नहीं पानी।
भूखे बच्चे चिल्लायेंगे,
याद आ जायेगी तब नानी।।
फसली खेत काटकर,
बन गए सुन्दर भवन निराले।
जमकर कर ले भोजन बन्दे,
पड़ने वाले हैं फिर लाले।।
जिस गति से कट रहे हैं,
जंगल, आएगी तबाही।
नहीं बचेगा तू भी,
मानव देने को गवाही।।
जहाँ एक वहाँ हुए इक्यावन,
ऐसे बढ़ी है संख्या।
अभी न जागे कब जागोगे?
जब बेकाबू होगी जनसंख्या।।
न होगा पानी न होगा भोजन,
ना ही मिलेगा आॅक्सीजन।
ना कपड़ा ना बिस्तर होगा,
आने वाला है वो दिन।।
समय रहते सम्भल जा बन्दे,
बचा ले अगली पीड़ी को।
एक ही नारा बना जीवन में,
हम दो हमारे दो।।
🙏 रचना :-
हरीश कोठारी (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० ग्वाड़ी
वि०ख०- गंगोलीहाट, जनपद- पिथौरागढ़
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड
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