बच्चों की यादें - श्रीमती गंगा आर्य जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद- पिथौरागढ़ से शिक्षिका बहिन श्रीमती गंगा आर्य जी की कविता :-


बच्चों की यादें


अरसे बाद आज स्कूल गई तो,

बच्चों तुमको वहाँ ना पाया।

तुम सबकी नटखट बातों ने,

आज मुझको बहुत सताया।।



हर कमरे का हर कोना,

देखो आज वीरान पड़ा है।

तुम सबके बिन प्यारे बच्चों!

विद्यालय आँगन सूना पड़ा है।।


आज किसी ने ना घेरा मुझको,

ना किसी ने स्वागत किया मेरा।

यादों ने तुम्हारी बहुत छेड़ा मुझको,

मायूसी ने घेरा मुझको।।


नजरें बार-बार ढूँढ रही थी तुमको,

काश तुम्हारी टोली आ जाती।

फिर से करते हम वही मौज मस्ती,

विद्यालय में वही रौनक आ जाती।।


किसको बोलती संग आकर खेलो?

किसको बोलती सुनो कहानी?

बगिया से मेरे आज पुष्प नदारद थे,

माली की आँखों में झरझर बह रहा था पानी।।


मिल जाते अगर तुम मुझको,

गले लगाती तुम सबको।

लम्बे अरसे की आप बीती,

सुनती और सुनाती तुमको।।


तुम सबकी यादों ने आज,

बहुत सताया, बहुत रुलाया।

सूना पड़ा है विद्यालय आँगन,

सूना पड़ा है विद्यालय भवन।।


अब और नहीं होता सहन,

उचित दूरी का करके पालन।  

देखो हम आ रहे हैं तुम्हारे द्वार,

ब्रिज कोर्स का लेकर भण्डार।।


अब धैर्य रखेंगे थोड़ा हम,

महामारी से निजात पाकर हम।

अपनी पढ़ाई सुचारू करेंगे,

महामारी को दूर भगायेंगे।।


🙏रचना :-


श्रीमती गंगा आर्या (प्र०अ०)

रा०प्रा०वि० भट्टीगाँव

वि०ख० बेरीनाग, पिथौरागढ़




🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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