महामारी से बचाव - श्रीमती अरुणा राज
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती अरुणा राज जी की कविता :-
महामारी से बचाव
अजी घर से बाहर नहीं जाइयेगा,
वरना मुसीबत में पड़ जाइयेगा।
जरा बात मेरी समझ जाइयेगा,
समझकर जरा गौर फरमाइएगा ।।
अजी घर से बाहर...
जरा भीड़ से बचकर चलो तो मैं मानू ,
बेवजह घर से बाहर न निकलो तो जानू।
अगर हो सके तो ठहर जाइयेगा,
ठहर कर जरा बात दोहराएगा॥
अजी घर से बाहर...
हाथों को धुलते रहोगे जो हरदम,
और मुँह को ढककर चलेंगे जो हम तुम।
तो ही बीमारी से बच पाइएगा,
यही बात लोगों को समझाइयेगा ।।
अजी घर से बाहर...
अभी तक तो इसकी सटीक दवा भी नहीं है,
केवल बचाव और सावधानी ही है ।
जरा लोगों को ये भी बतलाइयेगा,
कि घर से ही कामों को निपटाइयेगा ।।
अजी घर से बाहर...
🙏रचना :-
अरुणा राज (प्र०अ०)
रा० प्रा० वि० जिवालाखाल
वि०ख०- कीर्तिनगर
जनपद- टिहरी गढ़वाल
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

बहुत ही सुन्दर
जवाब देंहटाएंकोरोना बचाव हेतु कविता के के माध्यम से अच्छा सुझाव