गीत - श्री दीवान सिंह कठायत जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद- पिथौरागढ़ से शिक्षक साथी श्री दीवान सिंह कठायत जी की कुमाऊँनी लोक भाषा में कविता  :-


गीत


आज पहाड़ा बेचीणौ, यो धुरा बेचीणौ, 

गध्यारा बेचीणौ, गौं घर बेचीणौ। 

सरकारा तू काम कर पहाड़ा बचूँणौ, 

भू कानून येति ल्याजा थाता सेंत्योंणौ।।



बचा लियो आपणौ मुलुक देवभूमि अपार,

नी जाणि दियो इसिकै परायों का हाथ।

टका में बेची बे, हाथों है जाइ बे, 

गौचर बेची बे, पनघट देइ बे।।


नी रौलौ रंगिल कत्यूर, मुनस्यार सुकिलौ, 

सरकारा तू काम कर पहाडा़ बचूँणौ। 

मनखो अपणि माटि की यो सुणि लियो पुकार, 

नी करो मोल पराइ हाथों बचाओ रीत त्यौहार।।


डाइ बोटि नी रौला, वों कंक्रीट उगाला, 

बोलि भाषि नी रौला, घुघुती नी घोला।

नी होलो जागरा इष्ट देवों को, 

सरकारा तू काम कर पहाड़ा बचूँणौ, 

भू कानून येति ल्याजा थाता सेंत्योंणौ।।


🙏 रचना :-


दीवान सिंह कठायत (प्र०अ०) 

रा० आ० प्रा० वि० उडियारी

 बेरीनाग, पिथौरागढ़




🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

होली - श्रीमती सुशीला थपलियाल

माँ तुम - श्रीमती वन्दना जोशी

गौचर मेला-श्री सरोज डिमरी