नई तालीम-डाॅ० विनोद कुमार यादव जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद - रुद्रप्रयाग से शिक्षक साथी प्रवक्ता डायट डाॅ० विनोद कुमार यादव जी का शैक्षिक लेख :-
नई तालीम
तीव्र परिवर्तनों के वर्तमान दौर में ग्रामीण क्षेत्र नवीन चुनौतियों का समाना कर रहा है। सरकार ग्रामीण क्षेत्र को शहरी क्षेत्र के बराबर लाने के लिये कृत संकल्प है। इसके लिए वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा परिवर्तन के अन्य कारकों को सम्मिलित रूप से प्रयास करने की आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं पर ध्यान देने व ग्रामीण क्षेत्र के विकास कार्यक्रमों पर दृष्टिपात करने से, यह लगता है कि आज ग्रामीण क्षेत्र में सामाजिक सक्रियता कार्यक्रमों तथा सामाजिक नेतृत्व व संस्थागत क्षमता को मजबूत करने की अत्यन्त आवश्यकता है। यहाँ यह भी ध्यान रखने की आवश्यकता है कि इस तीव्र परिवर्तन से कहीं ग्रामीण क्षेत्र का सामाजिक ताना-बाना ही छिन्न-भिन्न न हो जाये। साथ ही ग्रामीण जनता में विभिन्न कौशलों को विकसित करते रहने का भी सतत् प्रयत्न करते रहना होगा तथा हो रहे परिवर्तनों के सन्दर्भ में लोगों का सही दृष्टिकोण बने इसकी भी कोशिश करनी होगी।
यह सब करते हुए, यह भी ध्यान में रखने की आवश्यकता है कि इस परिवर्तन के दौर में कहीं वह सब भी हो जाये जो ग्रामीण क्षेत्र में अच्छा है।
परिवर्तन की वर्तमान प्रक्रिया अत्यन्त जटिल है। ग्रामीण विकास की सबसे बड़ी चुनौती समुचित शिक्षा व उपयोगी कौशल उपलब्ध कराने की है। रोजगार प्राप्त करने व प्राप्त रोजगार को बनाये रखने में पेशेगत कौशल का विशेष कार्य सम्बन्धी कौशल की आवश्यकता होती है। इसी के समान महत्वपूर्ण है ग्रामीण क्षेत्र में कौशलयुक्त शिक्षा की उपलब्धता, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिये यह बहुत ही कठिन तथा व्यय साध्य है। इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ग्रामीण शिक्षा के मौकों को बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण बच्चों को इस तरह तैयार करने की आवश्यकता है कि वह बहुस्तरीय परिवर्तनों के अनुकूल अपने को ढाल सके तथा विकास के कार्यक्रम में भागीदारी कर सकें।
गाँधी जी का शिक्षा दर्शन समग्र शिक्षण है। "नई तालीम" सामाजिक परिवर्तन के लिये शिक्षा है। इस शिक्षा का उद्देश्य सभी का शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक विकास विशेषतः समाज के पिछड़े वर्गों का, शोषणमुक्त करके, समानता आधारित नव समाज की रचना करना है। शिक्षा का दायरा मात्र विज्ञान या अन्य विषयों के सिद्धान्त रटने व उनमें विशेषता पाने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। व्यक्ति की नेतृत्व क्षमता तथा दृढ़ संकल्प शक्ति का विकास आदि ऐसे गुण हैं जिनके विकास की आशा शिक्षा से की जाती है। समग्र दृष्टि रखने वाली शिक्षा से ही जिम्मेदार नागरिक का विकास सम्भव है जो समाज को नेतृत्व प्रदान कर समाज की भलाई के लिये काम कर सकेगा। इस तरह वैज्ञानिक, इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ या परिवर्तन के अन्य कारकों आदि सभी ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं को हल करने में अपनी-अपनी भूमिका का विस्तार करना होगा। इसीलिए ऐसा लगता है कि ग्रामीण शिक्षा का प्रथम उद्देश्य व्यक्ति के व्यवहार व स्वभाव तथा रूचि जैसे वृहत्तर व्यक्तित्व विकास से सम्बन्धित गुणों का विकास करना होगा और यही नई तालीम का प्रमुख तत्व है।
आज आवश्यकता है गाँधी जी द्वारा बोये गये नई तालीम के बीज को देशभर के ग्रामीण क्षेत्र में फैलाने की। नई तालीम शिक्षा को सामाजिक विकास के प्रमुख साधन के रूप में उपयोग करने से ही ग्रामीण क्षेत्र का उसकी पूरी क्षमता के साथ विकास सम्भव हो सकेगा। राष्ट्रीय महात्मा गाँधी ग्रामीण शिक्षण संस्थान परिषद् (MGNCRE) शिक्षण संस्थाओं के माध्यम से इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिये प्रयासरत है। जिसमें हमारे राज्य उत्तराखण्ड में राज्य शैक्षिक एवं प्रशिक्षण अनुसन्धान परिषद्, उत्तराखण्ड व इससे सम्बद्ध संस्थान, जिला शिक्षा एवं शिक्षण संस्थान, रतूड़ा, रूद्रप्रयाग पूर्ण रूप से प्रयत्नशील हैं।
महात्मा गाँधी जी ने ठीक ही कहा था कि, 'नई तालीम" का विचार भारत के लिए उनका अन्तिम एवं सर्वश्रेष्ठ योगदान है। गाँधी जी के जीवन-पर्यन्त चले सत्य के अन्वेषण एवं राष्ट्र के निर्माण हेतु सक्रिय प्रयोगों के माध्यम से लम्बे समय तक विचारों के गहन मन्थन के परिणामस्वरूप नई तालीम का दर्शन एवं प्रक्रिया का प्रादुर्भाव हुआ। जो केवल भारतवर्ष ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण मानव समाज को नई दिशा देने में सक्षम है।
🙏 लेखकः-
डॉ० विनोद कुमार यादव (प्रवक्ता/विज्ञान सन्दर्भ व्यक्ति)
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रतूड़ा, रूद्रप्रयाग।
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

शानदार लेख...
जवाब देंहटाएंप्रदत्त जानकारी के लिए धन्यवाद