गुरु की महिमा - श्रीमती हेमलता बहुगुणा

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में गुरु पूर्णिमा पर प्रस्तुत है जनपद-टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती हेमलता बहुगुणा जी की कविता :-


गुरु महिमा


गुरु की महिमा होय असीमा,

जिसकी व्याख्या की न सीमा।

अन्धकार में होई उजियारा,

उबड़-खाबड़ में होय सहारा।।



अन्धे की वो आँख कहलाये,

बहरे गुरु गुन सब बतलाये।

लँगड़ा ज्ञान की दौड़ लगाये,

गुरु गुण कोई लिख न पाये।।


गुरु ज्ञान है अपरम्पारा,

सच्चे गुरु का मिले सहारा।

फँसे जाल में झट सुलझाये,

जीवन का हर सार बताये।।


गुरु को ईश्वर ने भी माना,

भगवन से गुरु श्रेष्ठ ही माना।

सतगुरु सत् सत्य का ज्ञान,

गुरु ही जग में बड़ा महान।।


गुरु पूर्णिमा विष्णु प्रिय है,

गुरु महिमा तो जगत प्रिय है।।





🙏 रचना :-

हेमलता बहुगुणा (पूर्व प्र०अ०)

रा० उ० प्रा० वि० सुरसिंहधार 

ब्लॉक-चम्बा, टिहरी गढ़वाल


🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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