गुरु महिमा - श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी की कविता :-
गुरु महिमा
ज्ञान मिले, फल मिले, मिले सहारा,
हटे अज्ञानरूपी जीवन का हर अँधेरा।
सद्भाव मिले, सद्विचार मिले हर पल,
गुरु की महिमा से जीवन सुखद बना हरपल।।
जीवन की सफलताओं का हर पल,
गुरु की महिमा से रहा सदा सफल।
गुरु से मिला जीवन मूल्य का प्राण,
बस गुरु से ही हमारे जीवन की शान।।
हमारी अज्ञानता को नया रूप देते हैं,
हमारी नादानियों को नयी समझ देते हैं।
हमारे मन में ज्ञान का दीपक जलाते हैं,
बस हमें अपनी कृपा से जीना सिखाते हैं।।
बचपन के गुरु माँ-बाप की छाया,
बड़े होकर अपने गुरुजनों की छाया।
जीवन की नेकी का एक सुन्दर पल पाया,
मैंने इनकी महिमा से जीवन को सुदृढ़ बनाया।।
🙏 रचना
देवेश्वरी सेमवाल (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० कान्दी
वि० ख०- अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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जवाब देंहटाएंबहुतसुंदर
जवाब देंहटाएंGuru Brahma Guru Vishnu Guru devo maheshwara Guru sakshat parabrahma tasmai Shri gurave namah 🙏
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