बस्ता - श्रीमती रेखा रावत जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद रुद्रप्रयाग  से शिक्षिका बहिन श्रीमती रेखा रावत जी की कविता :-


*बस्ता*


कल यूँ ही वो मुझसे बोला, 

मन का राज यूँ उसने खोला। 

भाई मुझे एक बात बता !

है तूझे कुछ अता-पता?

 



पिछ्ले एक साल से तूने, 

मुझसे बात नहीं की प्यारी। 

ना तेरी पीठ पर बैठ कर, 

मैंने की है कोई सवारी।।



देख कैसे मैं पढ़ा हूं मैला, 

ऐसा वैसा बन गया हूंँ थैला। 

कभी तो मेरी सुध ले यार, 

नहीं तो माँ से पड़ेगी मार।।



मैं उठा बस्ते के पास गया, 

उसे प्यार से गोद बिठाया। 

दोस्त ! ऐसा ही समय है आया, 

हम सब पर एक संकट है छाया।



फिक्र न कर एक दिन आयेगा, 

जब ये संकट छँट जायेगा। 

तू करेगा फिर से मेरी सवारी, 

और बातें भी होंगी प्यारी-प्यारी।। 



फिर हम चारों होंगे साथ, 

हाथों में होंगे फिर हाथ। 

तुम, मैं और कलम दवात, 

रबड़, पेन्सिल, कॉपी, किताब।।


🙏 रचना:-


     रेखा रावत(स०अ०) 

     रा० प्रा० वि० तिमली भरदार 

ब्लॉक- जखोली, जनपद- रुद्रप्रयाग



🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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