सावन की फुहार - श्रीमती श्रीमती लता आर्य

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती लता आर्य जी की कविता :-


सावन की फुहार


इधर-उधर फिरती रहती,

हर बूँद फूलों पर गिरती।।

ये सावन की बूँदों की फुहार,

जब बरसे कहीं डर तो कहीं बहार।।



अपना रंग फूल खिलाते, 

फूल उसे बहुत लुभाते।

जिसको मेघ लगे डराने,

वही फूल लगे लुभाने।।


ये सावन के बूँदों की फुहार,

जब बरसे कहीं डर तो कहीं बहार।।


सावन दे सन्देश, 

चलो मत ऐसी चालें, 

जिससे संगी-साथी छूटें। 

आँखों में भरे आँसू,

मोती की माला टूटे।।


ये सावन की बूँदों की फुहार।

जब बरसे कहीं, डर तो कहीं बहार।।


मधुर रस, रंग-बिरंगी तितलियाँ।

ऐसे मिलो जैसे मधुवन की लड़ियाँ।

करें नृत्य सावन में मन लुभावन मोर,

देख-देख रंग बिरंगी तितलियाँ करे शोर।।


मै रहूँ इस आँगन में हर बार,

तू आकर जल्दी क्यों जाये, 

सावन की फुहार।

ये सावन के बूँदों की फुहार,

जब-जब बरसे, 

कहीं डर तो कहीं बहार।।


🙏 रचना :-


श्रीमती लता आर्य (प्र०अ०)

रा० प्रा० वि० मनोरा

वि० ख०-भीमताल

जिला- नैनीताल

उत्तराखण्ड



🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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