बस्ते की व्यथा - श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद रुद्रप्रयाग  से शिक्षिका बहिन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी की कविता :-


बस्ते की व्यथा 

 

आज मैं यूँ ही बस्ते के पास गया, 

थोड़ा उसका भी मैंने हाल सुना। 

बोला भाई, अब तुम्हें मेरी सुध आई, 

अरे ! एक साल से ले रहा हूँ अंगड़ाई।। 



बस्ता बोला जीवन का यह पल बेहाल,

तूने भी नहीं पूछा कभी मेरे हाल-चाल। 

एक साल से पड़ा हूँ लावारिस जैसा, 

तूने भी न सोचा हालचाल है कैसा।। 


देख पड़ा हूँ मैं किस तरह से मैला, 

बन रखा हूँ बस कूड़ेदान का सा थैला। 

बस कभी मेरी भी सुध ले लो भाई, 

मुझे तो हर पल तेरी याद आई।। 


मैंने भी आज प्यार से गोद में लिया, 

उसके दिल का हाल मालूम किया। 

भाई आज समय विकट आया है, 

हर कोई मुसीबतों में समाया है।। 


एक दिन जरूर अच्छा आएगा, 

यह मुसीबत का पल गुजर जाएगा। 

फिर से हम, तुम सब रूबरू होंगे, 

और हमारे स्कूल के दिन भी लौटेंगे।। 


फिर हम, तुम सब साथ होंगे, 

हाथों में हमारे हाथ होंगे। 

हम, तुम, गुरु और कक्षा, 

गुरु से मिलेगी फिर से शिक्षा।। 


    🙏रचना :-

         देवेश्वरी सेमवाल (स०अ०) 

           रा० उ० प्रा० वि० कान्दी

            ब्लॉक- अगस्त्यमुनि

                 जनपद- रुद्रप्रयाग



🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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