प्रकृति को समझें - श्रीमती पुष्पा तिवारी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रकृति के पूजन, हरियाली और खुशहाली के पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है जनपद-चम्पावत से शिक्षिका बहिन श्रीमती पुष्पा तिवारी जी की कविता :-
प्रकृति को समझें
प्रकृति को सब समझें,
हो शुद्ध वातावरण।
रहे स्वस्थ शरीर,
गाँव, मोहल्ला, समाज, देश, राष्ट्र।।
स्वस्थ विचार बने,
स्वर्ग से सुन्दर हो धरा।
ना रहे कोई तनाव,
ना कोई भेदभाव।।
धरा-धाम में हो हरा ही हरा,
खेत-खलिहान सब हों भरा-भरा
धरा, तुम ही तो है सब की मांँ,
पालन हारी, तुझे प्रणाम माँ।।
देखो धरा से सीखो कितनी पावन,
देखो अपनी गोद में लेकर करती पालन,
हम भी तो बने, उनकी जैसे।
सोच विचार कर लो मन में।।
ठान लो मन में, कर लो निश्चय,
कर लो संकल्प, यही बात मुझे बताना।
धारा जैसा महान बने,
यही संकल्प हमारा।।
🙏रचना :-
पुष्पा तिवारी (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० आमबाग
टनकपुर, चम्पावत
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

Bahut sundar
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