बेटी- श्रीमती हेमलता बहुगुणा

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन  में  प्रस्तुत है जनपद-टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती हेमलता बहुगुणा जी की कविता :-

बेटी 

माँ समझाये बेटी को, 

बेटी तुम्हें कोई खो नहीं सकता, 

अगर तुम कहीं खो गयी तो,                                         

संसार तुम बिन रह नहीं सकता।।



तुम प्यारी गुड़िया बनकर,

माँ बाप के घर आती हो।

और अपनी मासूमियत से उनके,

जीवन में छा जाती हो।।


अगर नजर से ओझल हो जाती,

दिल की धड़कन बन जाती है।

ये मन अश्रु धारा बनकर,

चारों तरफ फैल जाती है।।


बेटी तुम कमजोर नहीं,

तू तो हिम्मत वाली है।

चली जाये अगर कहीं तो, 

तेरे बिन यह घर खाली है।।


पापा-मम्मी की राज दुलारी हो,

दिल की धड़कन, आँखों सी प्यारी हो।।

 

 मेरी आश-साँस और मान हो तुम, 

परी लोक से आई मेरी जान हो तुम।

तुम जहाँ भी रहती मैं संग में हूँ तेरी,

सुनती रहती मैं हर धड़कन तेरी।। 


खुश रहो हमेशा यह दुआ है मेरी, 

काँटा भी न चुभे तुझे ये प्रार्थना मेरी।।


🙏रचना :-

श्रीमती हेमलता बहुगुणा (पूर्व प्र०अ०) 

रा० उ० प्रा० वि० सुरसिंहधार

ब्लॉक-चम्बा, टिहरी-गढ़वाल






🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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