श्रावणी हरियाली तीज - श्रीमती सरोज डिमरी जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में आज हरियाली तीज पर प्रस्तुत है जनपद चमोली से  शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी की कविता :-

श्रावणी हरियाली तीज 

तीज का पर्व बड़ा निराला,

खुश होकर के झूला डाला।

ले हिलोरें पेंग बढ़ायी,

सखियों के संग तीज मनायी।।



शिव-शंकर की रीति निभायी,

कृष्ण-राधा सी प्रीति बढ़ायी।

बरसात की फुहार में,

हरियाली की बौछार में।।


तन-मन को खुशहाल बनाती,

खुशनुमा तीज है आई।

हाथों में मेंहदी रचायी,

पैरों में महावर लगायी।।


मानव रासलीला मनायें,

हम तुम मिलकर चलें।

सावन की हरियाली में,

भादों की खुशहाली में।।


तन मन को जो विभोर कर दे,

ऐसी छटा आई है।

सावन के पावन महीने में,

देखो हरियाली तीज आई है।।


संस्कृति मन को भायी है,

प्रेम की साँस बसायी है।

अपने मन मयूर संग नाचे,

वर्षा ऋतु मन भायी है।।


आनन्दित हो खुश हो मन में,

लाजवती शर्मायी है।

इस निखरे मदमस्त रूप पर,

खुश हो सखियाँ आयी हैं।।


🙏 रचना - 


सरोज डिमरी (स० अ०) 

रा० आ० उ० प्रा० वि० गौचर

वि०ख० - कर्णप्रयाग, चमोली



🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

  1. सुख सौभाग्य के प्रतीक हरियाली तीज पर रचित सुंदर काव्य संरचना की बधाई
    माधुरी नैथानी

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  2. हरियाली तीज पर रचित सुन्दर पगंतियॉ के लिए 🙏🙏🙏🙏🙏♥️♥️♥️

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