सब पढ़ें, सब बढ़ें-श्रीमती शोभा दुर्गपाल

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है, आज जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती शोभा दुर्गपाल जी की कविता  :-


सब पढ़ें, सब बढ़ें


लेकर अपने हाथ किताबें,

हम तो पढ़ने जायेंगे।

पढ़ें, लिखें सब भारतवासी,

दुनिया को बतलायेंगे।।



अनपढ़ बच्चा कहीं किसी भी,

घर में ना छूट जाये।

होवे पढ़ा लिखा हर बच्चा,

ऐसी ज्योति जलायें।।


नव युग के हम हैं निर्माता,

नारा यही लगायेंगे।

पढ़े लिखे हों बेटा-बेटी,

ऐसी अलख जगायेंगे।।


सागर के सीने में जितने,

मोती हैं सब लायेंगे।

आ जाए तूफान भी चाहे,

उससे हम टकरायेंगे।।


भारत माँ की खातिर अपना,

सब अर्पण कर जायेंगे।

पढ़ें लिखें हों सभी नागरिक,

ऐसी अलख जगायेंगे।।


पी एम, सी एम, डी एम, ई, एम,

हम ही तो बनते हैं।

देश की सरहद पर रक्षा हित,

सैनिक भी हम बनते हैं।।


सारे देश में रहे उजाला,

जगमग दीप जलायेंगे।

पढ़े लिखे हैं हम सब बच्चे,

दुनिया को दिखलायेंगे।।


🙏 रचना-


 शोभा दुर्गापाल

रा० प्रा० वि० देवका धूरा

वि० ख० - भीमताल,

नैनीताल



🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

होली - श्रीमती सुशीला थपलियाल

माँ तुम - श्रीमती वन्दना जोशी

गौचर मेला-श्री सरोज डिमरी