बस्ते की उदासी-श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी की कविता :-


बस्ते की उदासी 


बहुत खुशी थी कि स्कूल,

 जायेंगे हम 2 अगस्त।

पर ना जाने क्यों सारी,

 उम्मीदें हो गयी ध्वस्त।।



कल तक सब मिलकर,

थे हम बहुत मस्त।

बस दो को स्कूल जाकर, 

रहेंगे हम सब व्यस्त।। 


बस बस्ता फिर से हुआ, 

आज बहुत नाराज।

बस बहुत ही गुमसुम,

बैठा था वह अकेले आज।।

 

बोला देखो बदल गया,

 फरमान सरकार का। 

बस पल भर में टूटा,

अरमान हम सबका।। 


हमने भी बड़े प्यार से,

उसे बहुत समझाया।

और बहला-फुसलाकर,

प्रेम से उसे मनाया।।

 

सुन तो पहले दो से तेरा,

 बड़ा भाई ही जाएगा।

और 16 से पुनः तेरा भी, 

नम्बर आ जाएगा।। 


बस्ता भी बिलकुल,

इस समय चुप न रहा। 

बोला पहले भी आप,

लोगों ने ऐसा ही कहा।।


बड़ा भाई प्यार से,

जाता रहा स्कूल,।

मुझ पर कोने में ही,

बस जम गयी धूल।। 


🙏रचना

देवेश्वरी सेमवाल (स०अ०)

रा० उ० प्रा० वि० कान्दी

वि० ख०- अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग



🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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