मैं नन्द गाँव का ग्वाला हूँ - श्रीमती माधुरी नैथानी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाओं के साथ प्रस्तुत है, आज जनपद पौड़ी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती माधुरी नैथानी जी की कविता -
*मैं नन्द गाँव का ग्वाला हूँ*
तुम मुझको कहाँ समझते हो,
सब अपनी 'धुन' में रहते हो।
मैं तुम्हारी राह बनाता हूँ,
पर, तुमअपनी राह में चलते हो ।।
तुम प्रीत लगाते मधुशाला,
भाती तुम्हें नित मद हाला।
मैं मन भावन मदिरा दीवाना
हूँ, दूध-दही का मतवाला।।
मूढ़मति क्या जाने मुझको,
कौन समझ पाया है मुझको?
मैं माखन पर रीझने वाला,
मेरे तो बस गोपी ग्वाला।।
मैं रति रूप का अधिनायक,
रास, प्रेम को जीता हूँ।
धर्म-कर्म का सार लिए,
मैं ही भगवत् गीता हूँ।।
यमुना तट पर खेल रचाऊँ
मैं नन्द गाँव का ग्वाला हूँ।
नाग फन पर नर्तन करता,
मैं यशोदा का लाला हूँ।।
मैं नटखट नटवर कहलाता
अधर बासुरी वाला हूँ।
मैं अपने युग का अभिनेता,
मैं, सतयुग, द्वापर, त्रेता हूँ।।
मैं पार्थ सारथी भावों का,
मैं लक्ष्य-सन्धान-'विजेता' हूँ।
मैं सारथी सत्य रथ का,
मैं कुरूक्षेत्र रण प्रणेता हूँ।।
मैं ग्वालन संग रास रचाऊँ,
ये जग सारी मेरी लीला है।
मैं ही रंगमंच रंगशाला हूँ,
मैं नन्द गाँव का ग्वाला हूँ।।
🙏 रचना :-
माधुरी नैथानी (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० भटोली
ब्लॉक- खिर्सू, पौड़ी गढ़वाल
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड


बहुत सुन्दर रचना
जवाब देंहटाएंसुंदर रचना के लिए बधाई।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर रचना,
जवाब देंहटाएंकरुणा और प्रेम का खजाना
कान्हा इसी रूप में हमारे संग रहना