श्रीकृष्ण जन्माष्टमी - श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पावन पर्व  की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाओं के साथ प्रस्तुत है, आज जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी की कविता -


श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 


काली अंँधेरी रात का वो उजाला, 

भाद्रपद की अष्टमी का सुन्दर नजारा। 

कंस के कारावास में गूँजी एक किलकारी, 

नयी लीला को रचने आये लीलाधारी।। 



अपनी लीला से वासुदेव जी को किया आजाद, 

बरसात की रात में करवाया उफनती यमुना पार। 

माँ यमुना ने भी कर प्रभु जी के चरणों को स्पर्श, 

बस अपने जीवन का समझो किया पल में उद्धार।। 


यशोदा मैया जी के पुत्र बनकर, 

गोकुल का जिन्होंने बढ़ाया मान। 

मटकी फोड़ माखन का चोर बनकर, 

यशोदा मैया की खाते थे हर-पल जान।। 



गोपियों के संग मिल रास रचैया, 

और बने राधा के कृष्ण कन्हैया। 

मुरली की धुन में चराते थे वे गैय्या, 

बस सदा बनकर ग्वाला कृष्ण कन्हैया।। 


🙏रचना

    देवेश्वरी सेमवाल( स०अ) 

       रा० उ० प्रा० वि० - कान्दी

        ब्लॉक- अगस्त्यमुनि

         जनपद- रुद्रप्रयाग




🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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