पावन पर्व - श्रीमती सरोज डिमरी जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में "स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर" प्रस्तुत है, आज जनपद चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी की कविता :-
पावन पर्व
स्वतन्त्रता के पावन दिन की,
यादें दिल में सँजोए हुए।
चौहत्तर वर्ष पूर्ण होने पर भी,
यह पर्व नवीनता लिये हुए।।
आजादी कैसे मिली?
यह इतिहास की बातें हैं।
कैसे क्या-क्या करना है हमको,
अहम मुख्य ये बातें हैं।।
कथा-कहानी हर कोई गढ़ता,
लेकिन अनुभव वह लेता है।
जो संघर्ष, वीरता, रणकौशल से,
बुद्धि चातुर्य दिखाता है।।
संयम-त्याग, नेतृत्व क्षमता से,
हर कार्य सम्भव बनाता है।
ऐसे सत्संगी महामानवों को,
विश्व सदैव याद करता है।।
स्वतन्त्रता के पावन पर्व पर,
गर्वित जन मानस हम।
श्रद्धा सुमन अर्पित करते,
वीरों का गुणगान करें हम।।
स्वतंत्रता की बलिवेदी पर,
खुशी-खुशी जो बढ़े कदम।
उन वीर-महापुरुषों को,
शत-शत नमन करते हम।।
इस तिरंगे ध्वज के नीचे,
शपथ आज हम लेते हैं।
मातृभूमि की तन-मन-धन से,
रक्षा का संकल्प हम लेते हैं।।
🙏 रचना :-
सरोज डिमरी (स०अ०)
रा० आ० उ० प्रा० वि० गौचर
वि०ख० - कर्णप्रयाग, चमोली
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

बहुत सुन्दर पगंतियॉ 🙏🙏🙏🙏🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏🙏🙏
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