स्कूल के दिन - श्रीमती रेखा पुरोहित जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती रेखा पुरोहित जी की कविता :-
*✍️स्कूल के दिन*
स्कूल का जब भी नाम आता,
हर कोई यादों में खो जाता।
सबकी अपनी-अपनी यादें,
चेहरे पर मुस्कान खिला दें।।
स्कूल के वो दिन सुनहरे,
दोस्तों के बिन सब अधूरे।
जल्दी घर से स्कूल को जाते,
फिर रास्ते भर गप्पें लड़ाते।।
हाफ टाइम में सब साथ रहते,
खेलते-कूदते और दौड़ लगाते।
कभी लड़ते और झगड़ते,
पर दोस्ती करने में न झिझकते।।
गृहकार्य जब करके न लाते,
सारे समय बस यही मनाते।
प्रार्थना बस एक ही गाते,
काश,शिक्षक आज न आते।।
छुट्टी का जब समय था होता,
घर जल्दी पहुंँचे मन में रहता।
घण्टी फिर जैसे ही बजती,
दौड़ सबकी घर को लगती।।
वो दिन भी क्या दिन होते थे,
बिना बात के खुश रहते थे।
घर व स्कूल हम बच्चों का,
सारी ही दुनिया तब होते थे।।
🙏 रचना :-
रेखा पुरोहित (स०अ०)
रा० प्रा० वि० सौंराखाल
विकासखण्ड- जखोली
जनपद- रुद्रप्रयाग
🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

Keep it up boji
जवाब देंहटाएं🙏🙏
हटाएंबहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएं🙏🙏🙏
हटाएंVery nice poem
जवाब देंहटाएं🙏🙏🙏🙏
हटाएं