सोचा मेरे मन ने - श्रीमती सुषमा नेगी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है, आज जनपद देहरादून से शिक्षिका बहिन श्रीमती सुषमा नेगी जी की कविता -


सोचा मेरे मन ने 


तितली से पंखों को, 

सारे ही रंगों को।

मन में उमंगों को, 

लेकर उड़ेंगे।।



फूलों की क्यारी सी, 

कली हो प्यारी सी। 

कुछ ख्वाब सच्चे, 

मन से बुनेंगें।।


कुछ सपने मन के, 

कुछ अपने पन के।

कुछ को जीवन में, 

लेकर जुड़ेंगे।।


मन में हो आशा, 

नया करने की अभिलाषा।

जब खुद को तराशा,

तब ही तो हम सपने बुनेंगें।।


जीवन सफल होगा, 

ऐसा वो कल होगा।

हर मुश्किल के,

हम से ही हल मिलेंगे।।


जब भी बिखरना,

गुल सा बिखरना।

फिर से बिखर के, 

फिर से खिलेंगे।।


गर रात जीवन में, 

मिल जाए कोई। 

चमकता हुआ, 

हम सितारा बनेंगे।।


न रुकना, न झुकना, 

न ठहरना कहीं पर।

उस दिन बशर्ते, 

हम खुद से मिलेंगें।।


🙏रचना-

 

सुषमा नेगी (स०अ०)

 रा० प्रा० वि० आर्यनगर काठबंगला, नगर क्षेत्र, देहरादून


🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

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